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Showing posts from April, 2019

पत्थर से दिल्लगी

"बिखरा पड़ा है दिल मेरा भी कांच की तरह, इक पत्थर से दिल लगाने की सज़ा कुछ इस तरह मिली।" 😑😔😑 ©Satyam Kumar

एक ख्वाहिश

"एक ख्वाहिश उनकी, की ज़ुबां से इज़हार करें हम, एक आरज़ू हमारी, की दिल कि ज़ुबां समझ लें वो।" 😑😔😑 ©Satyam Kumar

वक़्त

" वक़्त के तकाज़े बदल गए वरना, कोई हम से भी बात किया करता था दिन चढ़े, शाम ढले, रात गए" 😑😔😑 ©Satyam Kumar

आईना

" आईना है कुछ नहीं सब नज़र का धोखा है, नज़र आता है वही जो दिल में होता है" 😑😔😑 ©Satyam Kumar

निशानियां

"आज भी सिहर जाता हूं उसे याद करके, ये कमबख्त निशानियां भी पीछा नहीं छोड़ती" 😑😔😑 ©Satyam Kumar

नशा और ग़म

" नशा  तो करते हैं लोग ग़म  भुलाने को , कमबख्त उसे भूलना कौन चाहता है" 😐😐😐 ©Satyam Kumar

सूनी रातें

"कौन कमबख्त काटना चाहता है  सूनी रातों  को,  हम तो चैन से सोते हैं ताकि ख़्वाब देख सकें"  😐😐😐 ©Satyam Kumar